जानिए क्या है नेहरू-लियाकत पैक्ट

लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक (2019 ) को पेश करते वक्त गृहमंत्री अमित शाह  ने नेहरू-लियाकत पैक्ट का जिक्र किया. गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि अगर नेहरू-लियाकत पैक्ट फेल नहीं हुआ होता तो आज नागरिकता संशोधन विधेयक को पेश करने की जरूरत नहीं पड़ती. सवाल है कि नेहरू-लियाकत पैक्ट था क्या?


नेहरू-लियाकत पैक्ट
उस वक्त माहौल बड़ा विस्फोटक था. दोनों देशों के अल्पसंख्यकों के साथ काफी अत्याचार हुए. महिलाओं से बलात्कार के मामले सामने आए. पुरुषों और बच्चों की क्रूरता से मार डालने की घटनाएं हुई. इस पूरे मसले को सुलझाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान और भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बीच एक पैक्ट हुआ, जिसे नेहरू-लियाकत पैक्ट के नाम से जाना जाता है. दिल्ली में करीब एक हफ्ते की बैठक चलने के बाद दोनों देश एक एग्रीमेंट पर राजी हुए. इस पैक्ट में दोनों देशों में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उन्हें बाकी नागरिकों की तरह अधिकार देने का वादा किया गया था.

इस पैक्ट के अहम बिंदु

  1. पलायन करने वाले लोगों को ट्रांजिट के दौरान सुरक्षा दी जाएगी. उन्हें अपनी संपत्ति को बेचने का अधिकार होगा और इसके लिए वो सुरक्षित आ-जा सकते हैं.
  2. अवैध तरीके से अल्पसंख्यकों की कब्जाई संपत्ति को उन्हें वापस लौटाया जाएगा, जिन औरतों को अगवा किया गया है उन्हें उनके परिवार को वापस सौंपा जाएगा.
  3. दोनों देश अपने यहां के अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करेंगे. अल्पसंख्यकों को देश के दूसरे नागरिकों की तरह अधिकार दिए जाएंगे. जबरदस्ती धर्म परिवर्तन अवैध होगा और इसे रोका जाएगा.
  4. दोनों देश संयम से काम लेंगे और युद्ध भड़काने वाली और देश की अखंडता को प्रभावित करने वाले प्रचार को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा.
  5. इस समझौते को लागू करवाने के लिए दोनों देशों ने अपने अपने यहां अल्पसंख्यक आयोग बनाए, जिनका काम था इन समझौतों को पालन करवाना. दिल्ली के गवर्नमेंट हाउस में इस समझौते पर नेहरू और लियाकत अली खान ने दस्तखत किए थे.

नेहरू-लियाकत पैक्ट का उस वक्त नेहरू सरकार में उद्योग मंत्री रहे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने विरोध किया था. समझौता होने के दो दिन बाद ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था. मुखर्जी ने बाद में भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो बाद में चलकर भारतीय जनता पार्टी बनी. नेहरू लियाकत पैक्ट सफल रहा या नहीं इसको लेकर बहस चलती रही.